Mere Humsafar With RJ Nidhi

तनु जो की काशी में रहती है और वहां के एक छोटे बाल आश्रम में काम किया करती है, और अपना पूरा समय वहां के बच्चों के साथ व्यतीत किया करती है, तनु अपनी चाची दादी और अपनी बहन रागिनी के साथ रहती है काशी में , तनु दिल की बहुत ही साफ और बहुत ही प्यारी लड़की है पर स्वभाव से बहुत ही चंचल और नटखट है इसके साथ ही तनु बहुत ही ज्यादा गुस्से वाली है, जिसके वजह से उसके आए दिन किसी न किसी से पंगे या यूं कहें कि झगड़े होते रहते हैं ,तनु के इसी व्यवहार से उसकी चाची हमेशा उसे परेशान ही रहती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ आनंद जो कि अपने कुछ बिजनेस के कम से बनारस आया हुआ था, आनंद बहुत बड़ा और बहुत सक्सेसफुल बिजनेसमैन है, बनारस में आनंद की मुलाकात तनु से होती है और मुलाकात ऐसी होती है की पहली मुलाकात में दोनों एक दूसरे को अपना दुश्मन मान बैठते हैं , आनंद की जिंदगी का अब एक ही मक़सद है, तनु की जिंदगी को बर्बाद करना, वहीं दूसरी तरफ तनु की ज़िद है कि कुछ भी हो जाए वह इस आनंद के आगे तो बिल्कुल नहीं झुकेगी, आगे क्या होगा, क्या कभी इन दोनों की दुश्मनी प्यार में बदल पाएगी , या दिन प्रतिदिन है दुश्मनी और भी गहरी होती जाएगी, क्या होगा आगे जानने के लिए सुनते रहे मेरा हमसफ़र आरजे निधि |

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तन्वी अपनी दोस्त सुमन के साथ तेज कदमों के साथ मंदिर की ओर जा रही थी क्योंकि आज वह आरती के लिए लेट थी, तन्वी आगे जाने के कुछ देर बाद एक अजनबी शख्स से टकरा जाती है और टक्कर का पूरा इल्जाम उस शख्स के ऊपर डालकर गंगा आरती के लिए निकल जाती है, वह शख्स कोई और नहीं आनंद था ,जिसे तन्वी के ऊपर बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था।
आनंद को तन्वी के ऊपर बहुत गुस्सा आता है पर तन्वी आनंद की बातों को इग्नोर करते हुए गंगा आरती के लिए बढ़ जाती है आनंद का गुस्सा देखते हुए आर्यन आनंद को समझने की कोशिश करता है उसके बाद दोनों अपने काम के लिए निकल जाते हैं , वहीं दूसरी तरफ तनवीर सुमन को चीढ़ाते हुए कहती है की आरती नहीं किया और प्रसाद के लिए आ गई यह बोलकर दोनों आपस में हंसी मजाक करते हैं, हंसी मजाक मस्ती करने के बाद तन्वी कहती है कि जल्दी घर चलो वरना चाची छोड़ेंगे नहीं ,तन्वी की बातें सुनने के बाद सुमन कहती है तेरी चाची मेरी मां दोनों का कसाई है, जल्दी चलो नहीं तो सारा गुस्सा हमारे ऊपर ही उतरेगी |
मंदिर से घर लौट के बाद तन्वी अपनी दादी के पास जाती है उनसे आधी हिंदी और आदि पंजाबी में बात करती है, तभी तन्वी की दादी तन्वी को बताते हैं कि उसकी चाची उसे बुला रही है अपनी चाची का नाम सुनते ही तन्वी डर जाती और कहती है कि बचा लो मुझे अपनी बहुरानी से मैंने कुछ भी नहीं किया है तन्वी की बातें सुनने के बाद तन्वी की दादी उससे कहती है कि जाओ पहले सुन तो लो तुम्हारी चाची क्या कह रही हैं यह नौटंकी तुम बाद में करना |
तन्वी अपने चाचा सीमा के पास जाते ही कान पड़कर उठक बैठक करना चालू कर देती है और अपनी चाची को मानते हुए कहती है कि प्लीज मुझसे नाराज मत होना मुझसे बात करना बंद मत करना मैं घर के सारे काम करूंगी बस मुझसे नाराज मत होना तन्वी की ऐसी हरकतें देखने के बाद सीमा को एक पल हंसी आ जाती है उसके बाद वह तन्वी को बड़ी प्यार से समझती हैं कि टाइम से आया करो टाइम से जाया करो अपनी बड़ी बहन रागिनी की तरह सीमा अभी यह सारी बातें उसको समझे रही होती हैं, तन्वी रागिनी को इशारा करती है मानो जैसे उसे कहना चाह रही हो कि प्लीज बहन बचा ले मुझे
अपनी बहन तन्वी का इशारा पाते ही रागिनी उसके बचाव करने के लिए उसके पास आ जाती है और अपनी मां सीमा को समझाते हुए कहती है कि जाने दो बच्ची है सुधर जाएगी , तनु को समझाते समझाते सीमा इमोशनल हो जाती है,अपनी चाची को रोता देख तनु उनसे माफी मांगती है वह दोबारा ऐसा फिर नहीं करेगी यह उनसे कहती है तनु की बात सुनने के बाद उसकी चाची रहती हैं कि ऐसा मैं दोबारा होने नहीं दूंगी क्योंकि तुम काशी छोड़कर जा रही हो , सीमा की ऐसी बातें सुनने के बाद तन्वी रोने लगती है।
तन्वी को चुप करते हुए रागिनी रहती है कि चुप हो जा मत रो इतना तेरे साथ मैं भी तो बाहर जा रही हूं मैं तेरा पूरा ख्याल रखूंगी, रागिनी की बातें सुनने के बाद तन्वी कहती है कि मैं काशी से दूर नहीं जाना चाहती काशी में मेरा बचपन बीता है मेरी यादें हैं प्लीज समझो ना चाचा को कि मैं काशी से दूर नहीं जाना चाहती हुं,रागिनी तन्वी को चुप नहीं कर पाती है, उसके बाद रागिनी अपनी दादी रेनू के पास जाती है और उनसे कहती है कि वह तन्वी और सीमा में से किसी भी को समझा दे क्योंकि दोनों को समझ पाना मेरे बस में नहीं है रागिनी की बातें सुनने के बाद रेनू हां मैं हर हिलाते हुए कहती हैं कि, अच्छा ठीक है मैं सीमा से बात करूंगी देखती हूं उसका फैसला बदल पाती हूं या नहीं |
रागिनी की बार-बार समझाने के बाद तन्वी खाना खाकर सो जाती है थोड़ी देर बाद रेनू सीमा के पास जाती है और उससे कहती है कि तू ऐसा क्यों कर रही है तू तो तन्वी से बहुत ज्यादा प्यार करती है रेणु की बातें सुनने के बाद सीमा रहती है मैं जो कर रही हूं उसमें तन्वी की भलाई है सालों पहले उसे खोते खोते बची हूं मैं दोबारा उसे खोना फिर नहीं चाहूंगी वह आए दिन किसी न किसी से झगड़ा करती रहती है और अगल बगल के लोग तन्वी के बारे में कैसी-कैसी बातें करते हैं आपको पता है ना लोग अपने बच्चों को तन्वी के साथ नहीं भेजते हैं क्योंकि डरते हैं कि उनके भी बच्चे तन्वी के जैसे गुंडे ना बन जाए ,मुझे अब यह सब बर्दाश्त नहीं हो रहा है और मैं नहीं चाहती कि तन्वी रागिनी को मेरी बीमारी के बारे में पता चले बस यही वजह है जिसके वजह से मैं चाह रही हूं कि तन्वी काशी से दूर जाए और आप मेरा साथ दें ना की रागनी और तन्वी का क्योंकि मैं जो कर रही हूं वह सही है गलत नहीं और,मैं तन्वी की भलाई ही चाहूंगी |
तन्वी को उदास बैठा देख रेनू सीमा से कहती है कि देख बच्चे की कैसी हालत हो गई है बच्ची चंचल अच्छी लगती है ऐसी अच्छी नहीं लगती है कुछ कर तु, रेणु की बात सुनने के बाद सीमा रहती है हां मैं कुछ करती हूं उसके बाद सीमा अंदर रागिनी के पास जाते हुए कहती है कि रागिनी तुम तन्वी को मंदिर लेकर जाओ, मंदिर जाने के बाद तन्वी को अच्छा लगेगा सीमा की बातें सुनने के बाद, रागिनी सीमा को समझती है, की वह तन्वी से प्यार से बात करें, रागिनी की बात सुनने के बाद सीमा रागनी से कहती है कि जितना बोला है उतना करो बस |
रागिनी तन्वी के पास जाते हुए कहती है कि एक बात बोलूं तन्वी तू मानेगी क्या रागिनी को ऐसा बोलना देख तन्वी रहती आप बोलो मैं ना मानो ऐसा हो सकता है क्या आप मेरी फेवरेट वन हो मैं आपकी सारी बातें मानूंगी, तन्वी की बातें सुनने के बाद रागनी कहती कि आज मेरे साथ मंदिर चलेगी ,मेरा बहुत मन कर रहा है रागिनी की यह बात सुनते ही तन्वी रहती है कि पर मेरा मन नहीं कर रहा है मंदिर जाने का ,तन्वी से ऐसा जवाब पाने के बाद रागनी उदास हो जाती है और कहती है कि तू मेरे लिए किसी को पीट सकती है पर मेरे लिए मंदिर नहीं जा सकती है, उसके बाद तन्वी कहती है अच्छा ठीक है मैं आपके साथ मंदिर चल रही हूं बस उदास मत हो आप क्योंकि आप उदास अच्छी नहीं लगती हो, इस पर रागिनी रहती है कि उदास तू भी अच्छी नहीं लगती है ।
रागिनी तन्वी दोनों मंदिर के लिए निकल जाते हैं तभी रागिनी को कुछ याद आता है और वह तन्वी से कहती है कि वह भी 5 मिनट में आती है यह बोलने के बाद रागिनी बाहर पास की दुकान के पास जाती है जहां से बहुत ज्यादा आवाज आता है या देखकर रागिनी पूछती है कि हुआ क्या है बात क्या है तभी रागिनी को पता चलता है कि उसके सामने खड़ा शख्स बहुत ही बदतमीजी बात कर रहा है, रागिनी उसे शख्स पर गुस्सा करने लगती है और समझने लगती है की बात करने का एक तरीका होता है तो तुम उसे तरीके में बात करो और यह देख कर बात करो कि उनकी उम्र क्या है ,रागिनी की बात सुनने के बाद वह शख्स भी कहता है मुझसे जो जैसा बात करता है मैं उसे उसी लहजे में बात करता हूं।
इतने बड़े बिजनेसमैन होकर ₹10 के लिए अम्मा से बहसबाजी कर दिए रागिनी की बातों का जवाब देते हुए आर्यन कहता है कि मेरी गर्लफ्रेंड होने के बाद भी मेरे ऊपर चिल्लाई क्यों और तुम अपनी बहन की धमकी क्यों देती हो धमकी देने से अच्छा है मिलवा दो मुझे, आर्यन की बातों का जवाब देते हुए रागिनी रहती है यदि मेरी बहन को पता चल जाए कि तुम्हारी वजह से मुझे परेशान भी होना पड़ता है और तुम्हारा इंतजार भी करना पड़ता है वह तुम्हारा पैर तोड़ देगी बस यही वजह है कि नहीं मिलवाती हूं ,इस पर आर्यन कहता है रहने दो मत मिलवाओ साली जी से बहुत खतरनाक है ।
मंदिर में तन्वी को शांत बैठा देख पुजारी बाबा तन्वी के पास आते हुए पूछते हैं कि क्या हुआ है जो तुम इस तरह शांत बैठी हो तन्वी उन्हें जवाब देते हुए कहती है कि मैं सोच रही हूं कि आश्रम के बच्चों का क्या होगा ,इस पर पुजारी बाबा कहते हैं की परेशान होने वाली क्या बात है तुम हो ना और आश्रम के सभी बच्चे तुमको मानते भी हैं पुजारी बाबा की बात सुनने के बाद तन्वी धीमें स्वर में कहती है कि यही तो दिक्कत है कि अब मैं नहीं रहूंगी।
तन्वी पुजारी बाबा से बातें कर ही रही थी कि पीछे से कुछ लड़ाई झगड़ा जैसी आवाज सुनाई देती है आवाज को सुनने के बाद तन्वी कहती है कि यह मंदिर में कौन लड़ाई झगड़ा कर रहा है क्या उसे नहीं पता है मंदिर पूजा और आस्था का केंद्र है इस पर पुजारी बाबा कहते हैं कौन समझाए की मंदिर आस्था का केंद्र है लड़ाई झगड़ा का नहीं यह नई जनरेशन का अलग ही लोचा है।
आनंद को मंदिर के अंदर चिल्लाता देख तन्वी गुस्से से आनंद के पास जाती है और उसके गालों पर जोरदार एक चांटा लगाते हुए कहती है कि तुम्हारे अंदर इतनी भी समझ नहीं है और तुम्हें इतना भी नहीं पता है कि मंदिर के अंदर खड़े होकर लड़ाई झगड़ा और चिल्लाया तो बिल्कुल नहीं जाता है ना समझ इंसान हो तुम तन्वी की बात सुनने के बाद आनंद कहता है कि मैं तुमको छोडूंगा नहीं देख लेना
मंदिर से बाहर आने के बाद आनंद आर्यन को कॉल करके मंदिर के गेट पर बुलाता है वहीं दूसरी तरफ आर्यन रागिनी से कहता है कि मैं तुमसे दूर तो नहीं जाना चाहता हूं पर क्या करूं हर बार जाना पड़ जाता है मैं तुमसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं यह सारी बातें बोलने के बाद आर्यन वहां से चला जाता है आर्यन की जाने के बाद रागिनी भी कहती है प्यार तो मैं भी करती हूं और दूर तो मैं भी नहीं रहना चाहती हूं पर क्या करूं किस्मत में यही लिखा है तो क्या ही कर सकते हैं।
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